शिव स्तुति मंत्र श्लोक अर्थ सहित | Shiv Stuti Mantra Lyrics

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Shiv Stuti Mantra Lyrics, शिव स्तुति मंत्र श्लोक अर्थ सहित
Shiv Stuti Mantra Lyrics

शिव स्तुति मंत्र श्लोक अर्थ सहित (Shiv Stuti Mantra Lyrics)

शिव स्तुति मंत्र (Shiv Stuti Mantra)
कर्पुरगौरं करुणावतारं, संसारसारं भुजगेन्द्रहारं।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे, भवं भवानीसहितं नमामि।।

शिव स्तुति श्लोक (Shiv Stuti Sloka)
पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम।
जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम।।

महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम्।
विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम्।।

गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं गवेन्द्राधिरूढं गुणातीतरूपम्।
भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गं भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम्।।

शिवाकान्त शंभो शशाङ्कार्धमौले महेशान शूलिञ्जटाजूटधारिन्।
त्वमेको जगद्व्यापको विश्वरूप: प्रसीद प्रसीद प्रभो पूर्णरूप।।

परात्मानमेकं जगद्बीजमाद्यं निरीहं निराकारमोंकारवेद्यम्।
यतो जायते पाल्यते येन विश्वं तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम्।।

न भूमिर्नं चापो न वह्निर्न वायुर्न चाकाशमास्ते न तन्द्रा न निद्रा।
न गृष्मो न शीतं न देशो न वेषो न यस्यास्ति मूर्तिस्त्रिमूर्तिं तमीड।।

अजं शाश्वतं कारणं कारणानां शिवं केवलं भासकं भासकानाम्।
तुरीयं तम:पारमाद्यन्तहीनं प्रपद्ये परं पावनं द्वैतहीनम।।

नमस्ते नमस्ते विभो विश्वमूर्ते नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते।
नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्।।

प्रभो शूलपाणे विभो विश्वनाथ महादेव शंभो महेश त्रिनेत्।
शिवाकान्त शान्त स्मरारे पुरारे त्वदन्यो वरेण्यो न मान्यो न गण्य:।।

शंभो महेश करुणामय शूलपाणे गौरीपते पशुपते पशुपाशनाशिन्।
काशीपते करुणया जगदेतदेक-स्त्वंहंसि पासि विदधासि महेश्वरोऽसि।।

त्वत्तो जगद्भवति देव भव स्मरारे त्वय्येव तिष्ठति जगन्मृड विश्वनाथ।
त्वय्येव गच्छति लयं जगदेतदीश लिङ्गात्मके हर चराचरविश्वरूपिन।।

शिव स्तुति मंत्र श्लोक अर्थ सहित (Shiv Stuti Mantra Lyrics Meaning In Hindi)

पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम।
जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम।।

हिंदी अर्थ – हे पशुपति अस्त्र के स्वामी, हे पापों का नाश करने वाले, हम सभी के ईश्वर जिसने गजराज के चरम के वस्त्र पहने हुए हैं, जिनकी जटाओं के बीच में से माँ गंगा की धारा निकल रही है, उन्हीं शिवजी की स्तुति आज मैं करता हूँ।

महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम्।
विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम्।।

हिंदी अर्थ – महेश, सुरेश व अन्य देवताओं के अहंकार का नाश करने वाले, इस संपूर्ण विश्व के स्वामी, विभूति से अपने अंगों को सुशोभित करने वाले, सर्वत्र विद्यमान रूप वाले, तीन नेत्रों वाले, सदा आनंद में रहने वाले, पंच तत्वों के स्वामी शिव जी हैं।

गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं गवेन्द्राधिरूढं गुणातीतरूपम्।
भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गं भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम्।।

हिंदी अर्थ –पहाड़ों के स्वामी, भगवान गणेश के पिता, नीले रंग के गले वाले, बैल पर सवार, गुणों से भरपूर, विश्व के लिए सूर्य समान, भस्म से अपने अंगों को सुशोभित किये हुए, माता पार्वती के स्वामी, शिव जी के मैं भजन करता हूँ।

शिवाकान्त शंभो शशाङ्कार्धमौले महेशान शूलिञ्जटाजूटधारिन्।
त्वमेको जगद्व्यापको विश्वरूप: प्रसीद प्रसीद प्रभो पूर्णरूप।।

हिंदी अर्थ – हे एकांत में रहने वाले शिवजी, शम्भू, शशांक, पार्वती के स्वामी, त्रिशूल लिए हुए, जटाओं को धारण किये हुए, आप ही इस संपूर्ण जगत के स्वामी हैं, यह विश्व आपका ही रूप है, आप हमेशा प्रसन्न रहें।

परात्मानमेकं जगद्बीजमाद्यं निरीहं निराकारमोंकारवेद्यम्।
यतो जायते पाल्यते येन विश्वं तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम्।।

हिंदी अर्थ – परमात्मा का एक ही रूप है जो इस जगत के पालनहार हैं, उन्हें कोई मोह नही है, उनका कोई रूप नही है, वे सर्वत्र विद्यमान हैं। जहाँ भी हम जाएंगे, जहाँ भी विचरण करेंगे, हम विश्व में हर जगह उन्हीं को पाएंगे। इस विश्व के कण-कण में वे ही विद्यमान हैं।

न भूमिर्नं चापो न वह्निर्न वायुर्न चाकाशमास्ते न तन्द्रा न निद्रा।
न गृष्मो न शीतं न देशो न वेषो न यस्यास्ति मूर्तिस्त्रिमूर्तिं तमीड।।

हिंदी अर्थ – जिनका मिट्टी, जल, वायु, आकाश, अग्नि, इन्द्रियां, नींद, गर्मी, सर्दी, देश, वेश कुछ नही कर सकते हैं, उन शिवजी की मूर्ति को मैं प्रणाम करता हूँ।

अजं शाश्वतं कारणं कारणानां शिवं केवलं भासकं भासकानाम्।
तुरीयं तम:पारमाद्यन्तहीनं प्रपद्ये परं पावनं द्वैतहीनम।।

हिंदी अर्थ – जो जन्म-मृत्यु से परे हैं अर्थात शाश्वत हैं, जो सभी कारणों के भी कारण हैं, कल्याण करने वाले हैं, प्रकाश के भी प्रकाश हैं, सभी प्रकार की अवस्थाओं से परिपूर्ण हैं, सर्वत्र विद्यमान हैं, अंतहीन हैं, उन अविभाजित ईश्वर को मैं प्रमाण करता हूँ।

नमस्ते नमस्ते विभो विश्वमूर्ते नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते।
नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्।।

हिंदी अर्थ – विश्व का कल्याण करने वाले शिव जी, मैं आपको नमस्कार करता हूँ। परम आनंद को प्रदान करने वाले शिव जी को मैं नमस्कार करता हूँ। हे महान तपस्वी, हे योग के स्वामी, हे परम ज्ञान के स्वामी, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।

प्रभो शूलपाणे विभो विश्वनाथ महादेव शंभो महेश त्रिनेत्।
शिवाकान्त शान्त स्मरारे पुरारे त्वदन्यो वरेण्यो न मान्यो न गण्य:।।

हिंदी अर्थ – हे प्रभु, हे त्रिशूल धारण किये हुए महादेव, हे विश्व के स्वामी, हे महादेव, हे शम्भू, हे महेश, हे तीन आँखों वाले, हे शांत व एकांत मन वाले शिव, आपसे श्रेष्ठ व उच्च कोई भी नही है।

शंभो महेश करुणामय शूलपाणे गौरीपते पशुपते पशुपाशनाशिन्।
काशीपते करुणया जगदेतदेक-स्त्वंहंसि पासि विदधासि महेश्वरोऽसि।।

हिंदी अर्थ – हे शम्भू, महेश, दया के सागर, त्रिशूल धारण करने वाले, माँ गौरी के पति, पशुपति अस्त्र के स्वामी, पशुओं के बंधन से मुक्त कराने वाले, काशी नगरी के स्वामी, आप ही इस विश्व पर दया करते हो और सभी का उद्धार करते हो, आप ही इस जगत के ईश्वर हो।

त्वत्तो जगद्भवति देव भव स्मरारे त्वय्येव तिष्ठति जगन्मृड विश्वनाथ।
त्वय्येव गच्छति लयं जगदेतदीश लिङ्गात्मके हर चराचरविश्वरूपिन।।

हिंदी अर्थ – आप से ही यह जगत, देव आदि निकले हैं, आप से ही यह सबकुछ विद्यमान है। यह संपूर्ण जगत आप से ही निकला है, आप ही उसे सँभालते हैं और फिर अंत में यह आप में ही समाहित हो जाता है।

Shiv Stuti Mantra Lyrics in English

Pashuunaam Patim Paapa-Naasham Paresham
Gajendrasya Krttim Vasaanam Varennyam |
Jattaajuutta-Madhye Sphurad-Gaangga-Vaarim
Mahaadevam-Ekam Smaraami Smara-Arim ||

Mahesham Suresham Suraar-Aarti-Naasham
Vibhum Vishvanaatham Vibhuuty-Angga-Bhuussam |
Viruupa-Akssam-Indv-Arka Vahni-Tri-Netram
Sadaa-nandam-Iidde Prabhum Pan.ca-Vaktram ||

Giriisham Gannesham Gale Niila-Varnnam
Gavendra-Adhiruuddham Ganna-Atiita-Ruupam |
Bhavam Bhaasvaram Bhasmanaa Bhuussita-Anggam
Bhavaanii-Kalatram Bhaje Pan.ca-Vaktram ||

Shivaa-Kaanta Shambho Shashaangka-Ardha-Maule
Maheshaana Shuulin Jattaajuutta-Dhaarin |
Tvam-Eko Jagad-Vyaapako Vishva-Ruupa
Prasiida Prasiida Prabho Puurnna-Ruupa ||

Paraatmaanam-Ekam Jagad-Viijam-Aadyam
Niriiham Niraakaaram-Ongkaara-Vedyam |
Yato Jaayate Paalyate Yena Vishvam
Tam-Iisham Bhaje Liiyate Yatra Vishvam ||

Na Bhuumir-Na Ca-Apo Na Vahnir-Na Vaayur
Na Ca-akaasha Aaste Na Tandraa Na Nidraa |
Na Griissmo Na Shiito Na Desho Na Vesso
Na Yasya-Asti Muurtis-Tri-Muurti Tamiidde ||

Ajam Shaashvatam Kaarannam Kaarannaanaam
Shivam Kevalam Bhaasakam Bhaasakaanaam |
Turiiyam Tamah-Paaram-Aady-Anta-Hiinam
Prapadye Param Paavanam Dvaita-Hiinam ||

Namaste Namaste Vibho Vishva-Muurte
Namaste Namaste Cidaananda-Muurte |
Namaste Namaste Tapo-Yoga-Gamya
Namaste Namaste Shruti-Jnyaana-Gamya ||

Prabho Shuula-Paanne Vibho Vishvanaatha
Mahaadeva Shambho Mahesha Trinetra |
Shivaa-Kaanta Shaanta Smara-Are Pura-Are
Tvad-Anyo Varennyo Na Maanyo Na Gannyah ||

Shambho Mahesha Karunnaamaya Shuula-Paanne
Gaurii-Pate Pashu-Pate Pashu-Paasha-Naashin |
Kaashii-Pate Karunnayaa Jagad-Etad-Ekas _
Tvam Hamsi Paasi Vidadhaasi Maheshvarosi ||

Tvatto Jagad-Bhavati Deva Bhava Smara-Are
Tvayy-Eva Tisstthati Jagan-Mrdda Vishvanaatha |
Tvayy-Eva Gacchati Layam Jagad-Etad-Iisha
Lingga-atmakam Hara Cara-Acara-Vishva-Ruupin ||

Shiva Mantra Video !

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