मन मूरख इतना क्यों भटके लिरिक्स

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मन मूरख इतना क्यों भटके लिरिक्स

बोलो राम बोल राम बोलो राम राम,
मन मूरख इतना क्यों भटके,
तू राम नाम तो बोल ज़रा,
तू राम नाम तो बोल जरा…

जो दीखता है वह तेरा नहीं,
जो तेरा है वो दीखता नहीं,
तेरी आँखों पे माया का पर्दा पड़ा,
तू मन की आँखें खोल ज़रा,
मन मूरख, इतना क्यों भटके,
तू राम नाम तो बोल ज़रा,
तू राम नाम तो बोल जरा…

तू राम शरण में आ के तो देख,
तू राम को मन में बसा के तो देख,
तेरे बिगड़े काम बन जाएंगे,
तू हरी सहारे छोड़ ज़रा,
मन मूरख, इतना क्यों भटके,
तू राम नाम तो बोल ज़रा,
तू राम नाम तो बोल जरा…

तेरा अपना कोण पराया है,
ये तो सब हरी की माया है,
तेरी नैया भव से पार होगी
तू प्रभु से नाता जोड़ ज़रा
मन मूरख, इतना क्यों भटके,
तू राम नाम तो बोल ज़रा,
तू राम नाम तो बोल जरा…

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